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श्रीमद्भागवत द्वितीय स्कन्ध:षष्ठोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय स्कन्ध:षष्ठोSध्याय

विराट स्वरूप की विभूतियों का वर्णन – भूमिका -प्रश्न और प्रसंग -श्री शुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं ,राजन -जब नारद जी ने ब्रह्मा {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय: स्कन्ध:पंचमोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय: स्कन्ध:पंचमोSध्याय

सृष्टि वर्णन वक्ता ब्रम्हा जी -श्रोता देवऋषि नारद जी -कथा का आरम्भ ,नारद जी की जिज्ञासा – एक बार देवऋषि नारद जी अपने पिता ब्रम्हा {...}

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ब्रह्मा जी की तपस्या की कथाब्रह्मा जी की तपस्या की कथा

१.ब्रह्मा जी के जन्म के बाद घौर अज्ञान और अकेलापन – जब भगवान गर्भोदकशायी विष्णु की नाभी से कमल निकला तो उस कमल पर ब्रह्मा {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय:स्कन्ध: चतुर्थोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय:स्कन्ध: चतुर्थोSध्याय

विषय- राजा परीक्षित का सृष्टिविषयक प्रश्न और सृष्टि का आरम्भ शुकदेव जी की बात सुन कर परीक्षित का मन और शांत हो जाता है |अब {...}

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संसार के सभी काम ईश्वरीय हैंसंसार के सभी काम ईश्वरीय हैं

कौशिक नामक एक ब्राह्मण थे |ब्रह्मचर्य व्रत पर अटल थे |एक दिन पेड़ की छाँह में बैठे वेद पाठ कर रहे थे कि इतने में {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध द्वितीय,अध्याय तृतीयश्रीमद्भागवत स्कन्ध द्वितीय,अध्याय तृतीय

विषय: जो भगवान को नहीं भजते उन का जीवन व्यर्थ है | पहले दो अध्यायों में शुकदेव जी ने ध्यान का तरीका बताया ,अब तीसरे {...}

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श्रीमद्भागवत -द्वितीय: स्कन्ध:द्वितीय अध्याय :श्रीमद्भागवत -द्वितीय: स्कन्ध:द्वितीय अध्याय :

विषय-योग साधना से भगवान् के स्थूल और सूक्ष्म रूप का चिन्तन – पहले अध्याय में शुकदेव जी ने बताया कि ईश्वर का ध्यान करो |अब {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय: प्रथमोSध्याय :श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय: प्रथमोSध्याय :

विषय -ध्यान के योग्य परमेश्वर का स्वरूप राजा परीक्षित ने श्री शुकदेव जी से पूछा था कि मरने वाले आदमी को क्या करना चाहिए ? {...}

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ऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार ईश्वर का स्वरूपऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार ईश्वर का स्वरूप

बहुत से लोग पूछते हैं ईश्वर कैसा है ? कोई कहता निराकार ,कोई साकार |पुराण, ब्राह्मण ग्रंथ क्या कहते हैं ? ऐतरेय ब्राह्मण के आधार {...}

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अथैकोनविंशोSध्याय:प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)अथैकोनविंशोSध्याय:प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

परीक्षित का अनशन व्रत और शुकदेव जी का आगमन – राजधानी में पहुंचने पर राजा परीक्षित को अपने उस निन्दनीय कर्म के लिए बड़ा पश्चाताप {...}