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चाणक्य और शास्त्रों के अनुसार राजा (शासक) के कर्तव्यचाणक्य और शास्त्रों के अनुसार राजा (शासक) के कर्तव्य

चाणक्य और हमारे शास्त्रों में राजा को केवल शासक ही नहीं ,बल्कि प्रजा का पिता ,सेवक और योगी -तीनों एक साथ माना है | चाणक्य {...}

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मन्वन्तर और काल गणना का रहस्यमन्वन्तर और काल गणना का रहस्य

श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के एकादश अध्याय में सृष्टि के सब से गूढ़ तत्व -काल का वर्णन है |यह संवाद विदुर जी और मैत्रेय मुनि {...}

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सृष्टि के दस प्रकार -ब्रह्मा द्वारा रचना का विस्तारसृष्टि के दस प्रकार -ब्रह्मा द्वारा रचना का विस्तार

परमपावन श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कन्ध के नवम अध्याय में हम ने देखा कि ब्रह्मा जी ने भगवान की स्तुति की और भगवान ने उन्हें {...}

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वाराह अवतार की दिव्य कथावाराह अवतार की दिव्य कथा

तृतीय स्कन्द के त्रयोदशोSध्याय में ब्रह्मा जी की मानसिक सृष्टि का वर्णन सुनने के बाद विदुर जी के मन में जिज्ञासा और बढ़ गई | {...}

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श्रीमद्भागवत स्कंध तृतीय:द्वादशोSध्यायश्रीमद्भागवत स्कंध तृतीय:द्वादशोSध्याय

सृष्टि विस्तार ,कुमारों का वैराग्य और रूद्र की उत्पति – श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के बारहवे अध्याय में सृष्टि के आदि रहस्य का वर्णन है {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध तृतीय:नवमोSध्याय:की कथाश्रीमद्भागवत स्कन्ध तृतीय:नवमोSध्याय:की कथा

ब्रह्मा जी द्वारा भगवान की स्तुति – श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कन्ध के नवम अध्याय में सृष्टि के आदि ब्रह्मा जी द्वारा भगवान विष्णु की स्तुति {...}

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श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:अष्टमोSध्याय:श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:अष्टमोSध्याय:

ब्रह्मा जी की उत्पति – बहुत काल पहले की बात है |जब यह सम्पूर्ण सृष्टि महाप्रलय के जल में डूबी हुई थी ,चारों और केवल {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध तृतीय:सप्तमोSध्यायश्रीमद्भागवत स्कन्ध तृतीय:सप्तमोSध्याय

विदुर जी के प्रश्न – तृतीय अध्याय के सप्तम अध्याय में हस्तिनापुर छोड़ कर तीर्थ यात्रा करते हुए विदुर जी मुनिवर मैत्रेय जी से मिलते {...}

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श्रीमद्भागवत पुराण :तृतीय: स्कन्ध:षष्ठोSध्यायश्रीमद्भागवत पुराण :तृतीय: स्कन्ध:षष्ठोSध्याय

विराट पुरुष की उत्पति – प्राचीन काल की बात है ,जब सृष्टि का आरम्भ भी नहीं हुआ था ,तब केवल एक ही तत्व बिद्यमान था {...}

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श्रीमद्भागवत – भागवत कथाश्रीमद्भागवत – भागवत कथा

प्रस्तावना -श्रीमद्भागवत पुराण का तृतीय स्कन्ध सृष्टि रचना के रहस्यों को खोलता है |इस के पंचम अध्याय का नाम है”विदुर मैत्रेय संवाद “|इस अध्याय में {...}

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श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:चतुर्थोSध्याय:श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:चतुर्थोSध्याय:

उद्दव जी से विदा हो कर विदुर जी का मैत्रेय ऋषि के पास जाना – तृतीय स्कन्ध के चतुर्थ अध्याय में विदुर जी और उद्दव {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध:तृतीय:तृतीयोSध्याय:श्रीमद्भागवत स्कन्ध:तृतीय:तृतीयोSध्याय:

धृतराष्ट्र के महलों में जब अन्धकार छा गया था,जब कौरवों का अहंकार हस्तिनापुर की गलियों में विष घोल रहा था ,ठीक उसी समय विदुर जी {...}

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श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:द्वितीयोSध्याय:श्रीमद्भागवत तृतीय स्कन्ध:द्वितीयोSध्याय:

पृष्ठभूमि -दो भक्त,एक विरह हस्तिनापुर की गद्दी पर युधिष्ठर के बैठने के बाद विदुर जी तीर्थयात्रा पर निकल पड़े | ३६ साल घुमते घुमते प्रयास {...}

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महिदास ऐतरेय का आत्मचिंतनमहिदास ऐतरेय का आत्मचिंतन

परिचय :कौन थे महिदास ऐतरेय ? महिदास ऐतरेय प्राचीन भारत के एक महान वैदिक ऋषि थे ,इन का नाम सुनते ही “ऐतरेय ब्राह्मण “और ऐतरेय {...}

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श्रीमद्भागवत तृतीय:स्कन्ध: प्रथमोSध्यायश्रीमद्भागवत तृतीय:स्कन्ध: प्रथमोSध्याय

श्रीमद्भागवत का तृतीय स्कन्ध ‘सर्ग’ यानी सृष्टि प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करता है | द्वितीय स्कन्ध में ब्रह्मा जी द्वारा नारद को चतुश्लोकी भागवत {...}

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श्रीमद्भागवत द्वतीय:स्कन्ध: सप्तमोSध्याय:श्रीमद्भागवत द्वतीय:स्कन्ध: सप्तमोSध्याय:

भगवान के लीला अवतारों की कथा- अध्याय का सन्दर्भ -द्वितीय स्कन्ध के सप्त अध्याय में ब्रह्मा जी अपने मानस पुत्र देव्ऋषि नारद को भगवान के {...}

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श्रीमद्भागवत-द्वितीय:स्कन्ध:दशमोSध्यायश्रीमद्भागवत-द्वितीय:स्कन्ध:दशमोSध्याय

शीर्षक-भागवत के दस लक्षण -जीवन को समझने की दस चाबियां | गंगा तट पर बैठे राजा परीक्षित के मन में प्रश्न उठा ,वे शुकदेव जी {...}

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याज्ञवल्क्य का आत्म चिन्तन “मैं कौन हूँ ‘?की अमर खोजयाज्ञवल्क्य का आत्म चिन्तन “मैं कौन हूँ ‘?की अमर खोज

ऋषि याज्ञवल्क्य -वैदिक परम्परा के सब से तेजस्वी विचारकों में से एक हैं |वृहदारन्यक उपनिषद में इन की पत्नी मैत्रेयी के साथ संवाद भारतीय दर्शन {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय :स्कन्ध:नवमोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय :स्कन्ध:नवमोSध्याय

चतु:श्लोकी भागवत का उपदेश – श्रीमद्भागवत के द्वितीय स्कन्ध: ,नवम अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रम्हा जी को सृष्टि रचना से पहले केवल ४ श्लोकों {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय:अष्टमोSध्यायश्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय:अष्टमोSध्याय

मृत्यु के द्वार पर जिज्ञासा -“राजा परीक्षित के २९ प्रश्न “| १. कथा प्रवेश : गंगा तट पर अंतिम सात दिन कुरुजांगल देश के सम्राट {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय स्कन्ध:षष्ठोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय स्कन्ध:षष्ठोSध्याय

विराट स्वरूप की विभूतियों का वर्णन – भूमिका -प्रश्न और प्रसंग -श्री शुकदेव जी महाराज परीक्षित से कहते हैं ,राजन -जब नारद जी ने ब्रह्मा {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय: स्कन्ध:पंचमोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय: स्कन्ध:पंचमोSध्याय

सृष्टि वर्णन वक्ता ब्रम्हा जी -श्रोता देवऋषि नारद जी -कथा का आरम्भ ,नारद जी की जिज्ञासा – एक बार देवऋषि नारद जी अपने पिता ब्रम्हा {...}

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ब्रह्मा जी की तपस्या की कथाब्रह्मा जी की तपस्या की कथा

१.ब्रह्मा जी के जन्म के बाद घौर अज्ञान और अकेलापन – जब भगवान गर्भोदकशायी विष्णु की नाभी से कमल निकला तो उस कमल पर ब्रह्मा {...}

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श्रीमद्भागवत द्वितीय:स्कन्ध: चतुर्थोSध्यायश्रीमद्भागवत द्वितीय:स्कन्ध: चतुर्थोSध्याय

विषय- राजा परीक्षित का सृष्टिविषयक प्रश्न और सृष्टि का आरम्भ शुकदेव जी की बात सुन कर परीक्षित का मन और शांत हो जाता है |अब {...}

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संसार के सभी काम ईश्वरीय हैंसंसार के सभी काम ईश्वरीय हैं

कौशिक नामक एक ब्राह्मण थे |ब्रह्मचर्य व्रत पर अटल थे |एक दिन पेड़ की छाँह में बैठे वेद पाठ कर रहे थे कि इतने में {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध द्वितीय,अध्याय तृतीयश्रीमद्भागवत स्कन्ध द्वितीय,अध्याय तृतीय

विषय: जो भगवान को नहीं भजते उन का जीवन व्यर्थ है | पहले दो अध्यायों में शुकदेव जी ने ध्यान का तरीका बताया ,अब तीसरे {...}

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श्रीमद्भागवत -द्वितीय: स्कन्ध:द्वितीय अध्याय :श्रीमद्भागवत -द्वितीय: स्कन्ध:द्वितीय अध्याय :

विषय-योग साधना से भगवान् के स्थूल और सूक्ष्म रूप का चिन्तन – पहले अध्याय में शुकदेव जी ने बताया कि ईश्वर का ध्यान करो |अब {...}

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श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय: प्रथमोSध्याय :श्रीमद्भागवत स्कन्ध:द्वितीय: प्रथमोSध्याय :

विषय -ध्यान के योग्य परमेश्वर का स्वरूप राजा परीक्षित ने श्री शुकदेव जी से पूछा था कि मरने वाले आदमी को क्या करना चाहिए ? {...}

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ऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार ईश्वर का स्वरूपऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार ईश्वर का स्वरूप

बहुत से लोग पूछते हैं ईश्वर कैसा है ? कोई कहता निराकार ,कोई साकार |पुराण, ब्राह्मण ग्रंथ क्या कहते हैं ? ऐतरेय ब्राह्मण के आधार {...}

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अथैकोनविंशोSध्याय:प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)अथैकोनविंशोSध्याय:प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

परीक्षित का अनशन व्रत और शुकदेव जी का आगमन – राजधानी में पहुंचने पर राजा परीक्षित को अपने उस निन्दनीय कर्म के लिए बड़ा पश्चाताप {...}

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मेरी वेबसाईट thegodweknow.com/.inमेरी वेबसाईट thegodweknow.com/.in

मेरी वेबसाईट का उद्देश्य लोगों को ब्राह्मण ग्रन्थों के आधार पर ईश्वर के स्वरूप से अवगत करना है -मदन लाल शर्मा डोमेन नाम thegodweknow.com/.in-सीधा और {...}

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अथाष्टाद्शोSध्याय :प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)अथाष्टाद्शोSध्याय :प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

राजा परीक्षित को शृगी ऋषि का शाप -जब तक पृथ्वी पर राजा परीक्षित सम्राट रहे ,तब तक चारों और व्याप्त हो जाने पर भी कलियुग {...}

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सप्तदशोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)सप्तदशोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

महाराज परीक्षित द्वारा कलियुग का दमन -धर्म और पृथ्वी जब आपस में बात कर रहे थे उसी समय राजा परीक्षित वहां पहुंचते हैं ,तो क्या {...}

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षोडशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)षोडशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

परीक्षित की दिग्विजय तथा धर्म और पृथ्वी का संबाद -पांडवों के महाप्रयाण के बाद भगवान के परम भक्त राजा परीक्षित श्रेष्ठ ब्राह्मणों की शिक्षा के {...}

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अक्रोध की परीक्षाअक्रोध की परीक्षा

एक जिज्ञासु एक बार एक संत के पास गया और बोला – महाराज ,कोई ऐसा उपाय बताइए ,जिस से मुझे प्रभु का साक्षात्कार हो जाये| {...}

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पंचद्शोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)पंचद्शोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

श्रीकृष्ण विरह व्यथित पांडवों का परीक्षित को राज्य दे कर स्वर्ग सिधारना -भगवान के प्यारे सखा अर्जुन एक तो पहले ही श्रीकृष्ण के विरह से {...}

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द्वादशोऽध्यायः प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )द्वादशोऽध्यायः प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )

परीक्षित का जन्म – अश्वथामा ने जो ब्रह्मास्त्र चलाया था ,उस से उतरा का गर्भ नष्ट हो गया था ,परन्तु भगवान ने उसे पुन: जीवित {...}

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धर्म का रहस्य क्या है ?धर्म का रहस्य क्या है ?

धर्म कोई मनघडन्त वस्तू नहीं है | नित्य की जीवन यात्रा में धर्म के साथ मनुष्य का गहरा नाता है |धर्म से जीवन को मिलती {...}

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चतुर्दशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:( श्रीमद्भागवत)चतुर्दशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:( श्रीमद्भागवत)

अपशगुन देख कर महाराज युधिष्ठिर का शंका करना और अर्जुन का दवारका से वापिस आना – स्वजनों से मिल कर श्रीकृष्ण अब क्या करना चाहते {...}

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अलोभ धर्म का आदर्श – श्राबस्ती नरेश और ब्राह्मण कुमारअलोभ धर्म का आदर्श – श्राबस्ती नरेश और ब्राह्मण कुमार

कौशाम्बी के राजपुरोहित का पुत्र था अभिरूप कपिल | आचार्य इन्द्रदत्त के पास अध्ययन करने श्राबस्ती आया हुआ था | आचार्य ने उस के भोजन {...}

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वशिष्ठवशिष्ठ

अहिंसा के आदर्श महर्षि वशिष्ठ कुशिक वंश में उत्पन्न राजा विश्वमित्र सेना के साथ आखेट करने निकले थे | अपने राज्य से दूर महर्षि वशिष्ठ {...}

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सनातन धर्म का स्वरूपसनातन धर्म का स्वरूप

सनातन का अर्थ है नित्य |वैदिक धर्म का नाम सनातन धर्म अत्यंत उपयुक्त है |अन्य किसी भी भाषा में धर्म वाचक कोई भी शब्द नहीं {...}

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धार्मिक एकताधार्मिक एकता

संसार में अनेक धर्म,नाना मत और अगणित सम्प्रदाय हैं |प्रत्यक्षत: उन सब का उद्देश्य एक ही है – मानव हृदय में परस्पर एक आध्यात्मिक सम्बन्ध {...}

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त्रयोदशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)त्रयोदशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

विदुर के उपदेश से धृतराष्ट्र और गान्धारी का वन में जाना – विदुर जी तीर्थ यात्रा से लौट आये ,उन्हें जो कुछ जानने की इच्छा {...}

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एकादशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)एकादशोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

द्वारका में श्रीकृष्ण का राजोचित स्वागत -श्रीकृष्ण ने अपने आनर्त देश में पहुंच कर वहां के लोगों की विरह वेदना दूर करते हुए अपना पांचजन्य {...}

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भारत में आर्य आगमन निराधार हैभारत में आर्य आगमन निराधार है

आज से प्राय: कुछ सौ वर्ष पहले पूर्व प्रख्यात भाषाविद मैक्समूलर तथा उस के अनुयायों ने आर्यवाद की कहानी रची है | यह कहानी पूर्णत: {...}

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अथ दशमोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )अथ दशमोSध्याय -प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत )

श्रीकृष्ण का द्वारका गमन -सम्पूर्ण सृष्टि को उज्जीवित करने वाले श्री हरी परस्पर क्ल्हाग्नि से दग्ध कुरुवंश को पुन: अंकुरित कर और युधिष्ठर को उनके {...}

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नवमोSध्याय: प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)नवमोSध्याय: प्रथम:स्कन्ध:(श्रीमद्भागवत)

युधिष्ठर आदि का भीष्म जी के पास जाना और श्रीकृष्ण की स्तुति करते हुए भीष्म का प्राण त्याग करना -महाभारत का युद्ध समाप्त होने पर {...}

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श्रीमद्भागवत -अष्टमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)श्रीमद्भागवत -अष्टमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)

गर्भ में परीक्षित की रक्षा ,कुंती द्वारा भगवान की स्तुति और युधिष्ठर का शोक -पांडव श्रीकृष्ण के साथ अपने युद्ध में मरे भाई बन्धुओं के {...}

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सप्तमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)सप्तमोSध्याय (प्रथम:स्कन्ध:)

अश्वथामा द्वारा द्रौपदी के पुत्रों का मारा जाना और अर्जुन द्वारा अश्वथामा का मानमर्दन – जिस समय महाभारत युद्ध में कौरव और पांडव दोनों पक्षों {...}

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प्रथम:स्कन्ध:-षष्ठोSध्याय (श्रीमद्भागवत)प्रथम:स्कन्ध:-षष्ठोSध्याय (श्रीमद्भागवत)

नारद जी के पूर्वचरित्र का शेष भाग – व्यास जी की जिज्ञासा नारद जी की शेष आयु कैसे व्यतीत हुई और मृत्यु के समय उन्होंने {...}

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प्रथम:स्कन्ध:-पंचमोंSध्याय (श्रीमद्भागवत)प्रथम:स्कन्ध:-पंचमोंSध्याय (श्रीमद्भागवत)

महऋषि व्यास जी ने महाभारत की रचना की थी ,वे धर्म आदि पुरुषार्थों से परिपूर्ण थे ,सनातन ब्रह्म तत्व को भी जानते थे ,समस्त गोपनीय {...}

Theology

ऋषि शाण्डिल्य (तत्वचिंतन )ऋषि शाण्डिल्य (तत्वचिंतन )

छान्दोग्योपनिषद में शाण्डिल्यऋषि का तत्व ज्ञान दार्शनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है | शाण्डिल्य सृष्टि मीमांसा में चरम सत्य तज्जलान को प्रथमत: सिध्द करते हैं | {...}

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अथ चतुर्थोSध्यायअथ चतुर्थोSध्याय

इस वर्तमान चतुर्युगी के तीसरे युग द्वापर में महऋषि पराशर के द्वारा वसु-कन्या सत्यवती के गर्भ से भगवान के अवतार व्यास जी का जन्म हुआ {...}

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तृतीयोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:तृतीयोSध्याय:-प्रथम:स्कन्ध:

सृष्टि के आदि में भगवान् ने लोकों के निर्माण की इच्छा से पुरुष रूप धारण किया | उस में दस इन्द्रियां ,एक मन और पांच {...}

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प्रथम:स्कन्ध:-द्वितीयोSध्यायप्रथम:स्कन्ध:-द्वितीयोSध्याय

सूत जी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत अत्यंत गोपनीय रहस्यात्मक पुराण है | यह समस्त वेदों का सार है | जो लोग अज्ञानरूपी अन्धकार से पार {...}

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श्रीमद्भागवत -प्रथम: स्कन्ध: प्रथमोSध्यायश्रीमद्भागवत -प्रथम: स्कन्ध: प्रथमोSध्याय

मंगलाचरण – जिस से इस जगत की सृष्टि ,स्थिति,और प्रलय होते हैं ,क्यों की वह सभी पदार्थों में स्थित है और असत पदार्थों से अलग {...}

History Mythological Religion Religious

श्री मद्भागवत की महिमाश्री मद्भागवत की महिमा

ध्यायत्श्चरनाम्भोजं भावनिर्जितसा | औत्कन्ठ्याक्षुकलाक्षस्य हरदयासीन्में शनैर्हरि: | | प्रेमातिभरनिर्मिन्नपुलकाग्डोSतिनिर्वृत: | आनन्दसम्प्लवे लीनो नापश्यमुभ्यं मुने || रूपं भगवतो यत्नमन:कान्तं शुचापहम | अपश्यन सहसोतस्ये वैक्लव्याद दुर्मना इव {...}

Mythological Religion Religious

दध्यड आथर्वण ( ऋषि दधीचि )दध्यड आथर्वण ( ऋषि दधीचि )

महान तत्ववेता दध्यड के ,दधिची एवं दधीच नामान्तर थे |वे अथर्वकुल में उत्पन्न हुए थे | कई स्थानों में उन्हें अथर्वन का पुत्र कहा गया {...}

Mythological Religion Religious Theology

वामदेववामदेव

मह्रिषी वामदेव गोतम ऋषि के पुत्र थे | ऐसा माना जाता है कि उन्हें माता के गर्भ में रहते हुए ही आत्मानुभूति ,आत्म साक्षात्कार हुआ {...}

Religion Religious Theology

परोपकार मानव धर्मपरोपकार मानव धर्म

संसार में अनन्त जीव हैं ,उन में मानव ही सर्व श्रेष्ठ है | मह्रिषी व्यास जी ने भी यही कहा है कि मनुष्य से बढ़ {...}

Mythological Religion Religious Theology

संयम -पालन के आदर्श (अर्जुन)संयम -पालन के आदर्श (अर्जुन)

भगवान व्यास के निर्देशानुसार पांडवों ने नियम बनाया था कि द्रोंपदी के साथ पन्द्रह पन्द्रह दिन प्रत्येक भाई रहे | जब एक भाई द्रौपदी के {...}

History Mythological Religion Religious

गंगा पुत्रगंगा पुत्र

एक समय राजा शान्तनु गंगा के किनारे घूम रहे थे,उन्होंने देखा एक सुन्दर युवती गंगा के किनारे खड़ी थी | उस के सौन्दर्य और नवयोवना {...}

Mythological Religion Religious Theology

क्या महाभारत काल्पनिक है ?क्या महाभारत काल्पनिक है ?

भगवान् व्यास ऋषि पराशर के कीर्तिमान पुत्र थे | चारों वेदों का क्रमबद्ध करके उन का संकलन करने का श्रेय इन्हीं को है |महाभारत की {...}

Mythological Religion Religious Theology

आत्मदर्शन ही सच्चा धर्म हैआत्मदर्शन ही सच्चा धर्म है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने सभी देवताओं के बीच सब से पहले ब्रह्मदेव अर्थात ब्रह्मा की सृष्टि की और उस के बाद वह चराचर सृष्टि में प्रवृत {...}

Mythological Religion Religious Theology

मनुष्य को कितना चाहिएमनुष्य को कितना चाहिए

एकोSपि पृथ्वी कृत्स्नामेकच्छ्त्रा प्रशांस्ति च | एकस्मिन्नेव राष्ट्रे तु स चापि निवसेंनृप: || तस्मिन राष्ट्रSपि नगरमेकमेवाधितिष्टति | नगरेSपि गृहं चैकं भवेत तस्य निवेशनम || एक {...}

Mythological Religion Religious Theology

एक परमात्माएक परमात्मा

समस्त चराचर जगत में एक आत्मा ,परमात्मा या एक भगवान को देखने बाला धर्म ही वास्तविक धर्म है | वस्तुतः एक आत्मा या भगवान् के {...}

Mythological Religion Religious Theology

स्वामी विवेकानन्द के विचारस्वामी विवेकानन्द के विचार

संसार का प्रतेक धर्म गंगा और युफ्रेटिस नदियों के मध्यवर्ती भूभाग पर उत्पन्न हुआ है | एक भी बड़ा धर्म यूरोप या किसी दूसरे देश {...}

History Mythological Religion Religious Theology

त्याग मूर्ति श्री भरत जीत्याग मूर्ति श्री भरत जी

आगे होई जेहिं सुरपति लेई | अरध सिंघासन आसन देई|| -यह महाराज दशरथ का प्रभाव कहा गया है | अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट का वह {...}

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श्रीकृष्ण लीला का अंतश्रीकृष्ण लीला का अंत

महाभारत की युद्ध समाप्ति के बाद ,भगवान् श्रीकृष्ण छतीस वर्ष तक द्वारिका में राज्य करते रहे | उन के सुशासन में श्रीकृष्ण के समान वंशी {...}

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आत्मानुभूति -आत्मसाक्षात्कारआत्मानुभूति -आत्मसाक्षात्कार

महर्षि वामदेव जो गोतम ऋषि के पुत्र थे उन्हें गर्भ में ही आत्मानुभूति-आत्मसाक्षात्कार हुआ था | ब्रह्म -साक्षात्कार के लिए जीवन का कोई विशेष आश्रम {...}

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नारद -एक परिचयनारद -एक परिचय

भारत के ज्ञान और विज्ञान को जानने वाले महऋषि नारद जी का हमारे पुराणों में बार बार उल्लेख मिलता है | वे राजा हरिश्चंद्र के {...}

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ध्रुव का वन गमनध्रुव का वन गमन

ब्रह्मा जी के पुत्र महाराज स्वायम्भुव मनु और उन की पत्नी महारानी शतरूपा से प्रियव्रत और उतानपाद दो पुत्र हुए | उतानपाद की सुनीति और {...}

History Mythological Religious

सीता के जन्म की कहानीसीता के जन्म की कहानी

सर्व प्रथम सीता के जन्म की कहानी रामायण में ही वर्णित है ,जहाँ उस का पृथ्वी से उत्पन्न होने का उल्लेख मिलता है जो की {...}

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कुब्जा के वचन उद्धव के प्रतिकुब्जा के वचन उद्धव के प्रति

सुनियो एक संदेसो ऊधो गोकुल को जात | ता पाछे तुम कहियो उनसों एक हमारी बात || माता पिता को हेत जानी के कान्ह मधुपुरी {...}

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निर्गुण -सगुण ब्रह्मनिर्गुण -सगुण ब्रह्म

श्री कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद गोकुल वासी उन के वियोग से दुखी हो गये | नन्द यशोदा ,ग्वाल और गोपियों को सभी {...}

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कोई परमात्मा नहीं है केवल आडम्बर है ?कोई परमात्मा नहीं है केवल आडम्बर है ?

साकारमनृत् विद्धि निराकारं तु निश्चलं | एततत्वोपदेशेन न पुनर्भवसंभव: || आत्मा के साकार रूप को वास्तविक मत समझ | उस का रूप तो निराकार है,ज्ञान {...}

Mythological Religion Religious Theology

ययाति का गृह त्यागययाति का गृह त्याग

जैसे शरीरधारियों की छ: इन्द्रियाँ होती हैं वैसे ही नहुष के छ: पुत्र थे उन के नाम यति ,ययाति ,संयाति,आयती,वियति और कृति |नहुष अपने बड़े {...}

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श्री कृष्ण की लीला के पात्र गोपिकाये कौन थींश्री कृष्ण की लीला के पात्र गोपिकाये कौन थीं

भगवान की लीला पर विचार करते समय यह बात स्मरण रखनी चाहिए कि भगवान का लीलाधाम ,भगवान के लीलापात्र ,भगवान का लीलाशरीर और उन की {...}

Mythological Religion Theology

अष्टांगयोग की विधिअष्टांगयोग की विधि

योग के लक्षण जिस के द्वारा चित शुद्ध और प्रसन्न हो कर परमात्मा के मार्ग में प्रवृत हो जाता है | यथा शक्ति शास्त्र सम्मत {...}

Mythological Religion Religious Theology

भगवान परशुराम जीवन परिचयभगवान परशुराम जीवन परिचय

रेणुऋषि की कन्या रेणुका से जमदग्नि ने उस का पाणीग्रहण किया |रेणुका के गर्भ से जमदग्नि ऋषि के वसुमान आदि कई पुत्र हुए| उन में {...}

Religion Religious Theology

मुक्ति के तीन उपायमुक्ति के तीन उपाय

महात्मा बुद्ध ने उन्नीस वर्ष की आयु में ही जीवन में संसार के दुखों से मुक्ति प्राप्त करने का उपाय ढूँढने के लिए अपने परिवार {...}

History Mythological Religious Theology

परशुराम जी जो आज्ञापरशुराम जी जो आज्ञा

एक दिन की बात है ,परशुराम जी की माता रेणुका गंगातट पर गई हुई थी |वहां उस ने देखा कि गन्धर्वराज चित्ररथ कमलों की माला {...}

Theology

फ्रायड की वैचारिक शक्तिफ्रायड की वैचारिक शक्ति

प्रसिद्ध चिन्तक फ्रायड ने अपनी जीवनी में लिखा है कि एक बार वे अपनी पत्नी व् छोटे से बच्चे के साथ बगीचे में घूमने गए {...}

Religion Religious

वर्ण व्यवस्था ईश्वर रचित ?वर्ण व्यवस्था ईश्वर रचित ?

यत्पिंडे तत्ब्रम्हांडे” जैसा शरीर है वैसा ही ब्रम्हांड है |हजारों वर्ष पहले भारतीय मनीषियों ने गहन अध्ययन कर के यह निष्कर्ष निकाला था कि प्रत्येक {...}

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संबिधान सभा के सभापति और अध्यक्ष के भाषण की प्रासंगिकतासंबिधान सभा के सभापति और अध्यक्ष के भाषण की प्रासंगिकता

भारत में व्यबस्था की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि उस का संचालन करने वाले किस तरह के हैं | संचालनकर्ताओं की प्राथमिकता {...}

Mythological Religion Religious Theology

शिव जी का संकट मोचन रूपशिव जी का संकट मोचन रूप

(पुराणों से कहानियाँ ) भगवान शिव ने समस्त भोगों का त्याग कर रखा है लेकिन जो भी उन की उपासना करता है चाहे वह कोई {...}

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ब्राह्मण शुद्र स्त्री से विवाह कर सकता है ?ब्राह्मण शुद्र स्त्री से विवाह कर सकता है ?

(मनु स्मृति -अध्याय 2 श्लोक २३८) श्रद्धधान : शुभां विद्यामाददीताबराद्पि || अन्त्याद्पि परं धर्म स्त्रीरत्न दुष्कुलादपि || श्रध्दायुक्त हो शुभ कहिये जिस की शक्ति देखी {...}

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आत्मा -परमात्माआत्मा -परमात्मा

मनुष्य हमेशा प्रतिदिन की बातचीत में कई बार मैं शब्द का प्रयोग करता है लेकिन आश्चर्य है कि प्रतिदिन मैं और मेरा शब्द का कई {...}

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भक्ति योग का स्वरूपभक्ति योग का स्वरूप

प्रकृति ,पुरुष और महातत्व आदि के लक्षण सांख्य शास्त्र में कहे गए हैं तथा जिस के द्वारा उन का वास्तविक स्वरूप अलग अलग जाना जाता {...}

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वैराग्य,धारणा,ध्यानवैराग्य,धारणा,ध्यान

भौतिक सुखों के विषयों के प्रति उदासीनता विकसित करना वैराग्य है जिस ने सभी सांसारिक सुख और मोह माया का त्याग कर दिया है वह {...}

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सनातन धर्मसनातन धर्म

धार्यते इति धर्म:जो धारण किया जाये वह धर्म है ,समाज में मनुष्य जीवन के प्रति जो धारणा बनाता है वही उस का धर्म है |गीता {...}

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सृष्टी और मैंसृष्टी और मैं

सृष्टी से पहले यह जगत जिसे हम यूनिवर्स कहते हैं अंधकार में लीन और अज्ञात अर्थात जिसे जाना न जाये और अलक्षण अर्थात जो चिन्ह {...}

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समय की अवधारणासमय की अवधारणा

समय किसी भी कार्य को करने का सही क्षण होता है |समय अतीत से वर्तमान और भविष्य के क्रिया कलापों को क्रम में करता है {...}

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श्रीकृष्ण:शरण ममश्रीकृष्ण:शरण मम

निरखि किन नयना होऊ निहाल | अति अदभुत आनंद-अम्बुद -सी सोहत सो सुखमा सुविसाल ||१ || नीरद-तनु दामिनी-सी दमकत छिन-छिन छवि-कन झरत रसाल | अंग-अंग {...}